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‘द बकिंघम मर्डर्स’ को मिला वीकेंड का फायदा, पर ‘तुम्बाड’ को नहीं दे सकी मात, देखें कलेक्शन

The Buckingham Murders Box Office Collection Day 2: करीना कपूर स्टारर ‘द बकिंघम मर्डर्स’ 13 सितंबर को थिएटर्स में रिलीज हो गई है. हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर दमदार ओपनिंग नहीं कर पाई. करीना कपूर की ये मर्डर मिस्ट्री फिल्म का पहले दिन का कलेक्शन बेहद कम रहा था. लेकिन दूसरे दिन ‘द बकिंघम मर्डर्स’ को वीकेंड का फायदा मिला है और फिल्म की कमाई में इजाफा हुआ है.

सैकनिल्क के मुताबिक ‘द बकिंघम मर्डर्स’ ने पहले दिन 1.15 करोड़ रुपए की कमाई की थी. दूसरे दिन फिल्म का कलेक्शन बढ़ा और शनिवार को फिल्म ने 1.90 करोड़ रुपए का बिजनेस कर लिया. इस तरह दो दिन में ‘द बकिंघम मर्डर्स’ ने कुल 3.05 करोड़ रुपए का कलेक्शन कर लिया है.


‘तुम्बाड’ को नहीं दे पाई मात
करीना कपूर की फिल्म ‘द बकिंघम मर्डर्स’ की रफ्तार बॉक्स ऑफिस पर काफी स्लो है. 13 सितंबर को फिल्म का क्लैश सोहम शाह की हॉरर फिल्म ‘तुम्बाड’ से हुआ है जो कि थिएटर्स में री-रिलीज हुई है. लेकिन दोबारा रिलीज होने के बावजूद भी कलेक्शन के मामले में ‘तुम्बाड’ ‘द बकिंघम मर्डर्स’ को लगातार शिकस्त दे रही है. जहां दो दिन में करीना की फिल्म ने 3.05 करोड़ रुपए कमाए हैं तो वहीं ‘तुम्बाड’ ने दो दिन में 4 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन किया है.

क्या है ‘द बकिंघम मर्डर्स’ की कहानी?
‘द बकिंघम मर्डर्स’ को हंसल मेहता ने डायरेक्ट किया है. ये एक मर्डर मिस्ट्री है जिसमें करीना कपूर लीड रोल में हैं. करीना ने फिल्म में एक जासूस, जसप्रीत भामरा का किरदार निभाया है जो अपने बच्चे को खो देती है और दूसरे शहर में जाकर एक लापता बच्चे की इंवेस्टिगेशन करती है. करीना के अलावा फिल्म में कीथ एलन और रणवीर बराड़ भी अहम भूमिकाएं अदा करते नजर आए हैं.

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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